सूर्य अष्टकम (सूर्य अष्टकम) हिंदी में

भारतीय संस्कृति में सूर्य को विशेष स्थान प्राप्त है। सूर्य, जो दिन का आरंभ करने वाला और जीवन के प्रत्येक क्षण को प्रकाशित करने वाला देवता है, भारतीय आध्यात्मिक और धार्मिक परम्परा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। वेदों में सूर्य की महिमा का गुणगान किया गया है और अनेक श्लोकों और स्तोत्रों में उनकी स्तुति की गई है।

इन स्तोत्रों में से एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है "सूर्य अष्टकम"। सूर्य अष्टकम एक ऐसा स्तोत्र है जो सूर्य की महिमा, उनकी शक्ति और उनके दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है। इसमें कुल आठ श्लोक होते हैं, जिनमें सूर्य की महिमा और उनकी प्रति श्रद्धा प्रकट की गई है।

सूर्य अष्टकम के श्लोक न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि उनमें गहन आध्यात्मिक और योगिक अर्थ भी समाहित हैं। यह श्लोक व्यक्ति को आंतरिक शांति और स्फूर्ति प्रदान करने में सक्षम हैं। इसके नियमित पाठ से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है और आत्मा को एक नई ऊर्जा मिलती है।

सूर्य की उपासना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में सूर्य नमस्कार और सूर्य की पूजा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

सूर्य अष्टकम का पाठ करने से व्यक्ति को समृद्धि, स्वास्थ्य और दीर्घायु प्राप्त होती है। इस स्तोत्र के माध्यम से हम सूर्य देवता के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

सूर्य अष्टकम हिंदी में

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर ।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते ॥१॥

सप्तेश्वरथामारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ।
श्वेतपद्मधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥२॥

लोहितं रथमारूढं सर्वलोकपितामहम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥३॥

त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मविष्णुमहेश्वरम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥४॥

बृंहितं तेज:पुञ्जं च वायुमाकाशमेव च ।
प्रभुं च सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥५॥

बन्धूकपुष्पसंकाशं हारकुण्डलभूषितम् ।
एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥६॥

तं सूर्यं जगत्कर्तारं महातेज:प्रदीपनम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥७॥

तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानविज्ञानमोक्षदम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥८॥

इति श्रीशिवप्रोक्तं सूर्याष्टकं सम्पूर्णम् ।

सूर्याष्टकं पथेन्नित्यं ग्रहपीडा प्रणाशनम् ।
अपुत्रो लभते पुत्रं दारिद्रो धन्वान् भवेत् ॥

अमीषं मधुपानं च यः करोति रवेर्दिने ।
सप्तजन्मभवेत् रोगि जन्मजन्म दरिद्रता ॥

स्त्री-तैल-मधु-मांसानि ये त्यजंति रवेर्दिने ।
न व्याधि शोक दारिद्र्यं सूर्य लोकं च गच्छति ॥

हिन्दी भावार्थ

हे आदिदेव भास्कर! (सूर्य का एक नाम भास्कर भी है) आपको प्रणाम है, आप मुझ पर प्रसन्न हों, हे दिवाकर! आपको नमस्कार है, हे प्रभाकर! आपको प्रणाम है।

सात घोड़ों वाले रथ पर आरुढ़, हाथ में श्वेत कमल धारण किये हुए, प्रचंड तेज कश्यपकुमार सूर्य को मैं प्रणाम करता/करती हूँ।

मैं लोहितवर्ण रथारूढ़ सर्वलोकपितामह महापापहारी सूर्य देव को प्रणाम करता/करती हूँ।

जो त्रिगुणमय ब्रह्मा, विष्णु और शिवरूप हैं, उन महापापहारी महान वीर सूर्यदेव को मैं नमस्कार करता/करती हूँ।

जो विकसित हुए तेज के पुंज हैं और वायु तथा आकाशस्वरूप हैं, उन समस्त लोगों के अधिपति सूर्य को मैं प्रणाम करता/करती हूँ।

जो दुपहरिया के पुष्प समान रक्तवर्ण और हार तथा कुंडलों से विभूषित होते हैं, वे एक चक्रधारी सूर्यदेव को मैं प्रणाम करता/करती हूँ।

महान तेज के प्रकाशक, जगत के कर्ता, महापापहारी उन सूर्य भगवान को मैं नमस्कार करता/करती हूँ।

उन सूर्यदेव को, जो जगत के नायक हैं, ज्ञान, विज्ञान तथा मोक्ष को भी देते हैं, साथ ही जो बड़े-बड़े पाप को भी हर लेते हैं, मैं प्रणाम करता/करती हूँ।

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सूर्य अष्टकम न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसमें जीवन के अनेक गूढ़ रहस्यों को उजागर करने की शक्ति भी है। यह स्तोत्र हमें यह सिखाता है कि जीवन में प्रकाश और ऊर्जा का कितना महत्व है और कैसे हम सूर्य की आराधना के माध्यम से अपने जीवन को स्फूर्तिमान बना सकते हैं।

सूर्य, जो सृष्टि के आधार हैं, उनकी उपासना हमें यह सिखाती है कि हम भी अपने जीवन में सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार करें।

सूर्य अष्टकम का नियमित पाठ करने से न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी हमें लाभ होता है।

यह स्तोत्र हमें यह स्मरणीय श्रेय है कि सूर्य की किरणों के जीवन के प्रत्येक अंश को प्रकाशित करते हैं और हमें हर दिन एक नई शुरुआत करने का अवसर प्रदान करते हैं।

अंत में, सूर्य अष्टकम हमें अपने जीवन में प्रकाश, ऊर्जा और सकारात्मकता का महत्व समझाता है। यह स्तोत्र हमें प्रेरित करता है कि हम अपने जीवन को सर्वोच्च स्तर पर जियें और हर दिन एक नई ऊर्जा और उत्साह के साथ आरंभ करें।

सूर्य की महिमा और उनकी उपासना से हम अपने जीवन को स्फूर्तिमान और प्रसन्न बना सकते हैं। सूर्य अष्टकम का पाठ हमें यह सिखाता है कि जीवन में हर अंधकार के बाद उजाला आता है और हमें हर परिस्थिति में सकारात्मक बने रहना चाहिए।

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