जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती (जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी - आरती) हिंदी और अंग्रेजी में

हिंदू आध्यात्मिकता के विशाल विस्तार में भक्ति भजन और प्रार्थनाएं एक विशेष स्थान रखती हैं, जो भक्त और ईश्वर के बीच सेतु का काम करती हैं।

इनमें से, "जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी" आरती एक उज्ज्वल रत्न के रूप में खड़ी है, जो देवी अम्बे गौरी और देवी श्यामा गौरी के गुणों और महिमा का गुणगान करती है।

गहरी भक्ति और श्रद्धा से भरी यह आरती हिंदू घरों और मंदिरों में एक पोषित परंपरा है। इसके छंद देवी के दिव्य रूप की जीवंत छवि प्रस्तुत करते हैं, जो भक्तों के दिलों में विस्मय और श्रद्धा की भावनाएँ जगाते हैं।

आइये इस आरती के मनमोहक छंदों का गहन अध्ययन करें, तथा इसके गहन महत्व तथा इससे प्रेरित होने वाली शाश्वत भक्ति को समझें।

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी - आरती हिंदी में

जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निषदिन ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

मांग सिंदूर विराजत,
टीको मृगमद को ।
पतले से दोऊ नैना,
चन्द्रवदन नीको ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कनक समान कलेवर,
रक्ताम्बर राजा ।
रक्तपुष्प गल माला,
कंठन पर साजै ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

केहरी वाहन रजत,
खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत,
तिनके दुखहारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कानन कुंडल शोभित,
नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर,
सम रजत ज्योति ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

शुभ-निशुंभ बिदारे,
महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना,
निषदिन मदमाति ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चण्ड-मुण्ड संहारे,
शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे,
सुर भयहीन करे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी,
तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी,
तुम शिव पटरानी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत,
नृत्य करते भैरों ।
बाजत ताल मृदंगा,
अरु बाजत डमरू ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

तुम ही जग की माता,
तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुःख हरता ।
सुख संपति करता है ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

भुजा चार अति शोभित,
वर मुद्रा धारी । [खड्ग खप्पर धारी]
मनवांछित फल पावत,
सेवत नर नारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कंचन थाल विराजत,
अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु राजत,
कोटि रतन ज्योति ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

श्री अम्बेजी की आरती,
जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी,
सुख-संपति पावे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥

जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी ।

जय अम्बे गौरी मैया जय श्यामा गौरी आरती अंग्रेजी में

जय अम्बे गौरी मैया,
जा श्यामा गौरी
निशदिन तुमको ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिवजी ॥

मांग सिंदूर बिरजात,
टिको मृगमदको,
उज्ज्वलसे दोउ नैना,
चन्द्रवदन निको॥
॥जय अम्बे गौरी...॥

कनक समान कलेवर,
रक्ताम्बर राजे,
रक्तपुष्प गलमाला,
कंठहार साजे ॥
॥जय अम्बे गौरी...॥

केहरी वाहन रजत,
खड्ग खप्पर धारी
सुर नर मुनिजन सेवत,
तिनके दुखहारी ॥
॥जय अम्बे गौरी...॥

कानन कुंडल शोभित,
नासाग्रे मोती
कोटिक चंद्र दिवाकर,
सम्राट ज्योति ॥
॥जय अम्बे गौरी...॥

शुम्भ- निशुम्भ विदारे,
महिषासुर घटिया
धूम्र-विलोचन नैना,
निशदिन् मदमाति ॥
॥जय अम्बे गौरी...॥

चंदा-मुंडा संहेरा,
शोणित बीड हरे,
मधु-कटिताभ मारे,
सुर भयहिं करे॥
॥जय अम्बे गौरी...॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी,
तुम कमला रानी,
अगम-निगम बखानी,
शिव पटरानी मोड़ो॥
॥जय अम्बे गौरी...॥

चौंसठ योगिनी गावत,
नृत्य करत भैरों,
बाजत टैब मृदंग,
और बाजत डमरू ॥
॥जय अम्बे गौरी...॥

तुम हो जग की माता,
तुम ही हो भारता,
भक्तन की दुःख हरता,
सुख सम्पति करता ॥
॥जय अम्बे गौरी...॥

भुजा चार अति शोभित,
वर मुद्रा धारी,
मनवंचित फल पावत,
सेवत नर नारी॥
॥जय अम्बे गौरी...॥

कंचन थाल विराजत,
अगरु कपूर बाटी
मालकेतु मेन रजत,
कोटिरातन ज्योति ॥
॥जय अम्बे गौरी...॥

जय अम्बे गौरी मैया,
जा श्यामा गौरी
निशदिन तुमको ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिवजी ॥

निष्कर्ष

जैसे ही हम "जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी" आरती के छंदों के माध्यम से अपनी यात्रा का समापन करते हैं, हम स्वयं को देवी अम्बे गौरी और देवी श्यामा गौरी की दिव्य उपस्थिति की गहरी समझ से समृद्ध पाते हैं।

अपने भावपूर्ण छंदों के माध्यम से यह आरती न केवल देवी के दिव्य गुणों की प्रशंसा करती है, बल्कि भक्तों के लिए उनके साथ गहन स्तर पर जुड़ने का माध्यम भी बनती है।

इस आरती के प्रत्येक प्रस्तुतीकरण के साथ, हृदय भक्ति से भर जाता है, मन शुद्ध हो जाता है, और आत्मा दिव्य माँ की उपस्थिति में उत्थान पाती है।

देवी अम्बे गौरी और देवी श्यामा गौरी का आशीर्वाद हमारे जीवन को प्रेम, शांति और समृद्धि से रोशन करे। जय माता दी!

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